जिले के प्राचीन गंगा घाटों में पंचाल घाट सबसे प्रमुख है। यहाँ ऐतिहासिक मंदिरों की श्रृंखला स्थित है और वर्षभर श्रद्धालुओं का आगमन बना रहता है। अन्य महत्वपूर्ण घाटों में किला घाट, रानी घाट और बरगदिया घाट शामिल हैं।
ऐतिहासिक रूप से कंपिल से खुदागंज तक लगभग 36 घाटों की श्रृंखला विस्तृत थी, जिनमें अटैना घाट, ढाई घाट, मुगल घाट, चुन्नीलाल घाट, शाहजी घाट और रानी घाट प्रमुख थे। ब्रिटिश काल में ये घाट प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हुए। कोलकाता से गढ़मुक्तेश्वर तक चलने वाली नावों के माध्यम से नमक, नील, अफीम और वस्त्र जैसे सामानों का परिवहन किया जाता था।
लाल बलुआ पत्थर से निर्मित ये घाट अपनी जटिल नक्काशी और उत्कृष्ट शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध हैं। चूना, दाल, दूध और पुष्पों से प्राप्त प्राकृतिक रंगों का उपयोग सजावटी चित्रांकन में किया जाता था, जिससे इनकी स्थापत्य सुंदरता और अधिक निखरती थी। ये घाट आज भी फर्रुखाबाद की कलात्मक और ऐतिहासिक विरासत के अमिट प्रतीक हैं।.

